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घोषणा के 14 साल बाद तैयार हुआ सिग्नेचर ब्रिज

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी पर बना बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज 5 नवंबर से आम जनता के लिए खुल जाएगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 4 नवंबर को ब्रिज का उद्घाटन करेंगे। 2004 में ये प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, लेकिन अब 14 साल बाद ये जनता के लिए खोला जाएगा। 2007 में शीला दीक्षित के मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी थी। शुरूआत में इसे 2010 में दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले पूरा होना था।

2004 में इस पुल की अनुमानित लागत 494 करोड़ रुपए थी। बाद में यह 1,131 करोड़ हुई। इस परियोजना की लागत 2015 में बढ़कर 1,594 करोड़ रुपए हो गई। पहली दफा इस ब्रिज को 1997 में प्रस्तावित किया गया था तब इसकी लागत 464 करोड़ रुपए आंकी गई थी। ब्रिज की लागत 1518.37 करोड़ रुपए आई है। ब्रिज को तैयार करने में डेडलाइन 6 बार मिस हुई।

इस ब्रिज की खास बातें

  • कहा जा रहा है कि ये बेहतरीन टूरिस्ट स्थल साबित होगा। इस ब्रिज पर 154 मीटर की ऊंचाई पर शीशे का बॉक्स बनाया गया है। यहां से पूरे शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देगा।
  • इसमें चार लिफ्ट लगाई गई हैं, जिनकी कुल क्षमता 50 लोगों को ले जाने की है। लिफ्ट का अगले दो महीने में परिचालन शुरू हो जाएगा।
  • ब्रिज का मुख्य पिलर 154 मीटर ऊंचा है। इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से दोगुनी है। ब्रिज की लंबाई 575 मीटर और चौड़ाई 35.2 मीटर है।
  • यह ब्रिज वर्तमान में वजीराबाद पुल के वाहनों के बोझ को साझा करेगा। यह उत्तर और पूर्वोत्तर दिल्ली के बीच यात्रा के समय को कम करेगा।
  • पुल में पर्यटकों के लिए विशेष क्षणों को कैप्चर करने के लिए सेल्फी स्पॉट भी होंगे। ब्रिज पर 15 स्टे केबल्स हैं, जिन पर ब्रिज का 350 मीटर भाग बगैर किसी पिलर के रोका गया है।