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बीजेपी से बराबरी की सीटों का तालमेल कर नीतीश कुमार ने क़ायम रखी अपनी राजनीतिक हैसियत

बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और भाजपा दोनों लोकसभा में बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. ये घोषणा ख़ुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने की. इस घोषणा के बाद सीट बंटवारे को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों पर विराम लग गया है. अब लोगों में ये चर्चा का विषय ज़रूर है कि बराबर-बराबर सीटों का संख्या 16 होगी या 17. जेडीयू के अधिकांश नेताओं का कहना है कि ये संख्या 17 की होगी लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के प्रभारी भूपेन्द्र यादव कैसे रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को कम से कम सीटों पर मनाते हैं. हां, बराबरी की घोषणा के बाद सब मान रहे हैं कि भले NDA को एकजुट रखने के लिए ही सही, नीतीश कुमार की शर्तों को मान कर भाजपा ने राजनीतिक बलिदान दिया क्योंकि उनके जीते हुए सांसदों की संख्या पिछली बार 22 थी.

बिहार में नीतीश कुमार की बात मानने में भाजपा को इसलिए भी दिक्कत नहीं आयी क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने देखा है कि नीतीश अपने विधायकों से कम सीटों पर न केवल चुनाव लड़े बल्कि लालू यादव जिनके मात्र 22 विधायक थे, उन्हें 101 सीटें दीं, वहीं कांग्रेस जिसके चार विधायक थे उन्हें 40 सीटें मिलीं. इस घोषणा के बाद नीतीश कुमार का राजनीतिक क़द ना केवल अपनी पार्टी में बल्कि अन्य दलों में भी बढ़ा है.

महागठबंधन से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी के कार्यक्रम में कहा था कि बिहार में जेडीयू के बिना किसी की भी सरकार नहीं बन सकती. शायद यह एक ऐसा सच है जिससे BJP के नेता भलीभांति परिचित थे कि नीतीश कुमार को कम सीटें देकर या उनके बिना अगले लोकसभा चुनाव में जाना काफ़ी महंगा पड़ सकता था. हालांकि नीतीश ने भी कुछ ऐसी राजनीतिक चालें चलीं जिससे BJP पर दबाव बढ़ा.

उनके पक्ष में जो बात सबसे ज्‍यादा रही वो बिहार BJP के वरिष्ठ नेताओं का अपने राष्ट्रीय नेताओं को दिया गया फीडबैक था, जिसमें उन्होंने साफ़ कह दिया था कि नीतीश कुमार के बिना जाने का जोखिम न उठाएं. हालांकि नीतीश कुमार के करीबी लोगों का कहना है कि ये जो सीटों का तालमेल हुआ है यह केवल और केवल उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बीच बातचीत का नतीजा है.हालांकि शुरुआती दौर में बिहार BJP के प्रभारी भूपेंद्र यादव और जनता दल यूनाइटेड के सांसद आरसीपी सिंह और मंत्री ललन सिंह भी इस बातचीत की दौड़ में शामिल थे लेकिन निर्णायक दौर की बातचीत का ज़िम्मा ख़ुद नीतीश कुमार ने अपने ऊपर रखा.